शिव यंत्र

शिव सनातन देव हैं। दुनियां में जितने भी धर्म है वे किसी न किसी रूप या नाम से शिव की ही अराधना करते है। ये कही गुरू रूप में पूज्य है तो कही निर्गुण,निराकार रूप में। शिव यंत्र की पूजा , शिव की कृपा देती है । विवाह , सन्तान , रोजगार में परेशानी से त्रस्त लोगों के लिये वरदान है। कुण्डली में सूर्य ग्रह के कमजोर होने पर अच्छा करने पर भी बुरा फल मिलता है, अपयश मिलता है, नेत्र रोग, दांतों और हड्डी के रोग हो जाते हैं । सिद्ध शिव यंत्र से इन सभी समस्याओं का समाधान होता है।

महामृत्युंजय यंत्र

शिव है तो सारी सृष्टि हैं।शिव का एक रूप है “महामृत्युञ्जय” जो सभी को अमृत प्रदान करते है।
मृत्युञ्जय शस्त्र विहीन है पर उनकी शक्ति अमृतेश्वरी पीताम्बरा माता हैं।जो कहती है “देते रहिये शिव,बांटते रहिए,जीव पर करूणा बरसाते रहिये,मैं तो अमृत कुण्ड की स्वामिनी हूँ और आप मेरे स्वामी है।
महामृत्युंजय मंत्र के साथ यंत्र की प्रतिष्ठा से संजीवनी शक्ति स्थापित हो जाती है । रोग , कष्ट , मारकेश की दशा , शनि की साढ़ेसाती के बुरे प्रभाव को दूर करती है । मृत्यु के मुख से बाहर लाने का सामर्थ्य होता है सिद्ध यंत्र और मंत्र में ।

शिव शक्ति यंत्र

शिव की प्रतिष्ठा में शक्ति दोनों साथ चलते है।हे पथिक!शिव बार बार आते है हमें बचाने, परम करुण भाव से दोनों हमें देखते हैं और कल्याण करते हैं । दाम्पत्य जीवन की परेशानी , असाध्य रोग, सन्तान सम्बन्धित व्याधि , परिवार में अशांति ये सब शिव शक्ति यंत्र की कृपा से दूर होते हैं , शिव शक्ति की कृपा के साथ आध्यात्मिक प्रगति के लिये इस सिद्ध यंत्र की प्रतिष्ठा आवश्यक होती है ।

हनुमान यंत्र

हमारे सनातन धर्म मे रुद्रा अवतार हनुमान सदैव विराजमान है,मनुष्य हो या देवी,देवता सभी के कार्य को सम्पन्न करते है हनुमान जी। राम भक्त,दुर्गा भक्त हो या शिव भक्त,सभी मार्गो मे परम सहायक होते है हनुमान। ये शिव अंश भी,शिव पुत्र भी है राम के भक्त भी वही सीता के पुत्र हैं।ये कपि मुख है,वही पंचमुख,सप्तमुख,और ग्यारहमुख धारण करने वाले है।ये सभी जगह सूपूजित है कारण ये संकटमोचन है। हनुमानजी का यंत्र समस्त संकटो को दूर करने वाला , पीड़ा हरण करने वाला , विद्या प्रदायक और साधना सहायक है । भूत प्रेत, डाकिनी, शाकिनी जैसी विभिन्न तामसिक शक्तियों से रक्षा होती है । टोने टोटके विफल हो जाते हैं । इस सिद्ध यंत्र से साक्षात हनुमत कृपा का लाभ होगा और दिव्य अनुभव भी होगा ।

गणेश यंत्र

माता-पिता के लिए संतान ही सबकुछ होता है।सर्वोपरि और परम माता- पिता शिव-शक्ति है इन्हें हम प्रकृति और पूरूष कहते है ये निराकार एवं निर्गुण है । इस प्रकृति और पूरूष का जो परम प्रेम है वह श्री गणेश है । प्रकृति अपने दुःख के निवारण के लिए ही श्री गणेश की उत्पति से अपने सारे संतानो की पीड़ा हरती है । ये कोई भी बाधा को तत्क्षण दूर कर भक्त की मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। किसी भी व्यवसाय में सफलता देते हैं । बुध ग्रह के दोष को दूर करते हैं । बच्चों की पढ़ाई में मन न लगना और कमजोर बुद्धि का ये निवारण करते हैं । विद्या, बुद्धि की चातुर्यता प्रदान करते हैं । जल तत्व के दोष दूर करते हैं । वाणी में दोष, जलोदर, ज्वर, अस्थमा, स्नायु तंत्र के रोगों का निवारण होता है । इनके सिद्ध यंत्र के पूजन से सभी कामनाएं पूर्ण होतीं हैं ।

सरस्वती यंत्र

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमलमति दे……
मति ही गति है । गायन, वादन, नृत्य इन सभी कलाओं से मिलकर बनता है संगीत । संगीत की देवी हैं माता सरस्वती । इन क्षेत्रों में सफलता के लिये इनकी कृपा जरूरी है । बुद्धि के विकास , परीक्षा में सफलता , वादविवाद , तर्क , ज्ञान , इंटरव्यू में सफलता के लिये सिद्ध सरस्वती यंत्र सहायक है ।

गायत्री यंत्र

विश्वामित्र गायत्री मंत्र के ऋषि हैं । जगत के कल्याण के लिये विश्वामित्र जी ने गायत्री माता को प्रकट किया था । गायत्री की उपासना के बिना सारे यंत्र , मंत्र , तंत्र निष्फल होते हैं । सिद्ध गायत्री यंत्र की पूजा से माता गायत्री की कृपा मिलती है । सूर्य ग्रह के दोष भी दूर होते हैं । इस यंत्र की महिमा अपार है । समस्त आरोग्यता और जीवन में आध्यात्मिक और सांसारिक सफलता के लिये इनके यंत्र की पूजा का विधान है ।

लक्ष्मी यंत्र

माता लक्ष्मी इस संसार में अर्थ सागर की खेवैया हैं । स्वर्ण कलश को लिये यह व्यक्ति के आर्थिक विपन्नता को दूर करती हैं । साधक यदि गृहस्थ है तो बिना इनकी सहायता के वह धन सम्बन्धित विपन्नता के प्रपंच में उलझ जाता है । रोजगार , धन , व्यापार में प्रगति के लिये इनका सिद्ध यंत्र पूर्णतः कारगर है ।

रामरक्षा यंत्र

दैहिक दैविक भौतिक तापा राम राज नहीं काहूहिं व्यापा , त्रिविध दोष दुख दारिद दावन कलि कुचालि कलि कलुष नसावन ।
रामरक्षा यंत्र इस कलियुग में वरदान है , समस्त आपत्तियों को दूर करने वाला , संकट से रक्षा करने में महान है । श्रीराम की कृपा से अर्थ धर्म काम मोक्ष सभी इस यंत्र की सहायता से फलीभूत होते हैं ।

दश महाविद्या यंत्र

दक्ष प्रजापति की पुत्री सती जो शिव पत्नि थी,उन्होनें एक बार शिव को निमंत्रण नहीं दिये जाने पर अपने क्रोध में आकर शिव से बोली की मुझे अपने पिता के यहा जाना है,कि उन्होनें ऐसा क्यों किया।शिव का अपमान सती को मर्माहत कर दिया था।शिव इस पक्ष में नहीं थे,कि बिना निमंत्रण सती जाये।इस प्रसंग को टालने के लिए सती के कहने पर भी शिव उठकर चल दिये।तभी सती ने शिव को रोकने के लिए अपना दश स्वरुप प्रकट किया।प्रथम सती ने काली का भयंकर रुप प्रकट किया।उस रुप को देख कर शिव भी भाग पड़े,तो सती ने अपना दश रुप दशों दिशाओं में प्रकट कर दिया।अब शिव जाये तो कहा जाये,शिव रुक गये और सती को जाने की आज्ञा दी।सती जानती थी,कि ये शरीर छोड़ना है,उसके पूर्व दश रुप प्रकट कर दी,जो दश महाविद्या के नाम से प्रसिद्ध है।ये सिद्ध विद्यायें है,इन्हे ब्रह्म विद्या भी कहा जाता है।इन सभी की उपासना कलियुग में विशेष फलप्रद है,परंतु बिना गुरु मार्ग के यह साधना फलिभूत नहीं है।ये भक्तों को स्वरुप प्रदान करती है,आत्म दर्शन कराती है,और परमात्मा के सामने लाकर स्वयं एक का रहस्य से परिचित कराती है।इनका दश नाम जिसमें प्रथम १.काली,२.तारा,३.श्री महा त्रिपुरसुंदरी षोडशी,४.भुवनेश्वरी,५.भैरवी,६.छिन्नमस्ता,७.धूमावती,८.बगलामुखी,९.मातंगी,१०.कमला।
सिद्ध दशमहाविद्या यंत्र से साधना के मार्ग अनावृत होते हैं । परा विज्ञान अनुभूत होता है । समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होतीं हैं ।

बगलामुखी यंत्र

हर ओर शत्रुओं से घिर जाने पर कोई भी रास्ता न सूझने पर यह यंत्र तत्काल प्रभाव देता है । वर्षों से मुकदमे में फंसे होने पर धन और समय दोनों व्यर्थ चले जाते हैं । माता की कृपा से मुकदमे में जीत होती है । वादविवाद में विजय मिलती है ।
सिद्ध यंत्र के पूजन से परिवार में शांति बनी रहती है । शत्रुपक्ष कभी भी परिवार में हानि नहीं पहुंचा पाते ।

नवग्रह यंत्र

इस यंत्र को स्थापित करने से घर के समस्त वास्तु दोष का निवारण होता है । समस्त ग्रह अनुकूल हो जाते हैं । जो ग्रह पीड़ा दे रहे होते हैं वे सम हो जाते हैं । परिवार सुख समृद्धि बनाये रखने के लिये सम्पूर्ण नव ग्रह यंत्र सर्वोत्तम उपाय है ।

सन्तान गोपाल यंत्र

कलियुग में सुपुत्र की प्राप्ति एक चिंता का कारण है , सन्तान गोपाल यंत्र की पूजा से सुयोग्य सन्तान की प्राप्ति के साथ , परिवार में बच्चे अनुशासित एवं धर्म पथ पर चलने वाले बन जाते हैं । प्रत्येक गृहस्थ के लिये यह यंत्र सुखकारी है ।

श्रीयंत्र

प्रतिदिन श्रीयंत्र के दर्शन मात्र से ही इसकी अद्भुत शक्तियों का लाभ मिलना शुरू हो जाता है, ऐसा पौराणिक शास्त्रों में उल्लेख है। अत: मनुष्‍य को चाहिए कि वे हर रोज श्रीयंत्र के दर्शन और पूजन का लाभ अवश्य लें। इस यंत्र के अभिषिक्त जल का सेवन करने से अनेक बीमारियों में लाभ मिलता है । परा विज्ञान के द्वार खुलते हैं । यह यंत्र शिरोमणि है । यंत्रराज है । समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और जीवन को लालित्य से पूर्ण करने वाला विज्ञान है । इस यंत्र के पूजन से समस्त भौतिक आवश्यकताएं पूर्ण होतीं हैं । धन की कमी दूर होती है। समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाला यह माता त्रिपुरसुंदरी का यंत्र अमूल्य है ।

पन्ना के गणेश

पन्ना के गणेश की प्राणप्रतिष्ठित मूर्ति बुध ग्रह के लिये महत्वपूर्ण उपाय है । वाक कुशलता , त्वरित बुद्धि , प्रबन्धन आदि गुण वर्तमान तकनीकी के युग की मांग हैं । यह सब गुण बुध ग्रह की विशेषताएं हैं । गणेश विघ्नहर्ता और सर्वार्थसिद्धि प्रदायक हैं । पन्ना पत्थर ( बुध ग्रह ) और गणेश जी की कृपा का अनूठा संगम होता है पन्नग गणेश की मूर्ति । बच्चों की बुद्धि की विकास के लिये , उनके पठन पाठन और वाक कुशलता के लिये पन्नग गणेश पहनाये जाते हैं अथवा घर में पूजित होते हैं ।

सूर्य यंत्र –

सूर्य आत्मा है , जगत के पालनकर्ता हैं , भौतिक जीवन की प्रसिद्धि हैं । सूर्य अग्नि हैं यदि कुंडली में सूर्य सन्तान कारक ग्रहों के साथ अशुभ भाव या कमजोर युत हों तो सन्तान उपलब्धि में विघ्न होने लगता है । इनके प्रसन्न होते ही स्वस्थ और सुंदर तेजस्वी सन्तान की प्राप्ति होती है । सूर्य शिव हैं , सूर्य नेत्र हैं । प्रशासनिक सेवाओं में सफलता के लिए इनका अनुकूल होना आवश्यक है । त्वचा रोग से ग्रसित साम्ब को कृष्ण ने सूर्य की आराधना करने की सलाह दी , जिससे वे त्वचा रोग से मुक्ति पाये । प्रसिद्ध गायत्री मंत्र , सूर्यपरक है । गायत्री मंत्र से सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । यूं तो सूर्य देव के वैदिक मंत्र , बीज मंत्र बहुत से हैं जिनका प्रयोग पुस्तकों में या अन्यत्र मिल जाता है लेकिन तांत्रोक्त विधि से प्रतिष्ठित यंत्र का प्रभाव त्वरित होता है जो गोपनीय होता है । सिद्ध यंत्र का मिलना दुर्लभ है , इस यंत्र के प्रयोग मात्र से दिव्य अनुभूति होगी जिसे धारक स्वयं अनुभूत करेगा और उपरोक्त बताए गए सांसारिक विघ्नों पर सूर्यदेव की कृपा प्राप्त कर लाभ पायेगा ।

चंद्र यंत्र

चंद्र के प्रभाव में मन है , मन की चंचलता और सुंदरता चंद्र से अभिव्यक्त होती है । चंद्र कल्पनाओं को जन्म देता है जिसे साकार मनुष्य करता है । ऐसे कार्य जिसमें कल्पनाओं का सहारा लेना पड़ता है , जैसे डिजाइनिंग , कुंकिंग , डेकोरेटिंग , पेंटिंग , ऑर्गनाइजिंग , एडिटिंग , एड मेकिंग इन सबमें सफलता के लिये चन्द्र देव की कृपा विशेष होती है ।यदि कुण्डली में चन्द्रमा निर्बल हैं तो उपरोक्त क्षेत्रों में असफलता मिलती है क्योंकि इन सब क्षेत्रों के लिये कल्पना की रचनात्मक उड़ान जरूरी होती है । ऐसे में चन्द्र यंत्र इन सब रोजगारपरक क्षेत्रों में आशातीत सफलता प्रदान करने में सक्षम हैं ।
स्त्रियों में चंद्र का महत्व सूर्य से अधिक होता है । रजोधर्म से लेकर स्त्रियों के अधिकांश रोगों के मूल में चंद्रमा की भूमिका होती है । मातृत्व के विकास में चंद्र तत्व का योगदान है । हार्मोनल दिक्कत , केश की अल्पता , सुंदरता में कमी ये सब चंद्र की निर्बलता से होती है । निर्बल चंद्र को सबल करने हेतु मोती पहना जाता है लेकिन साथ में तांत्रोक्त विधि से सिद्ध चंद्र यंत्र हो तो प्रभाव बढ़ जाता है । युवाओं में डिप्रेशन , एंग्जायटी जैसे अनगिनत मानसिक विकार चंद्र के कमजोर होने से होते हैं । चंद्र यंत्र इन सभी समस्याओं के लिये वरदान है । डिप्रेशन , अवसाद , स्त्रियों में रोग , कैंसर , आदि में लाभ के लिये , आधुनिक क्रिएटिव फील्ड के रोजगारों के लिये , शेयर मार्केट , दुग्ध व्यापार में सफलता के लिये , कुण्डली में चंद्र के दोष को दूर करने के लिये चंद्र यंत्र अति प्रभावी है , जिसके प्रभाव को स्वअनुभूत करना किसी अमृत की प्राप्ति से कम नहीं है ।

मंगल यंत्र

मंगल साहस है , मंगल आत्मविश्वास है , मंगल शक्ति है , मंगल योद्धा है । सेना और चिकित्सा के क्षेत्र में मंगल का आधिपत्य है । कुशल प्रबन्धन की शक्ति मंगल के पास है । मंगल अग्नि है । बहुत सी पत्रिकाएं जब मांगलिक होतीं हैं तो उनका गठबंधन किसी मांगलिक पत्रिका के साथ ही करवाते हैं कारण मंगल अग्नि के समान है जो दाम्पत्य जीवन को जला डालता है ऐसे में अग्नि के समक्ष केवल अग्नि ही रह सकता है । मंगल की निर्बलता के चलते रक्त दोष , मांसपेशियों का रोग , आत्मविश्वास में कमी , डिप्रेशन , चोट , दुर्घटना जैसी चीजें घटित होतीं है । बहुत बार किन्हीं कारणवश मंगल के रत्न को न धारण कर सकने पर मंगल का यंत्र बहुत प्रभावी होता है । सिद्ध प्राणप्रतिष्ठित मंगल के यंत्र को गृह में रखने से मंगल दोष के कारण उतपन्न दाम्पत्य कलह समाप्त हो जाता है । मंगल दोष जनित रक्त विकार , एलर्जी , मांसपेशियों की दिक्कतें , सर्वाइकल , पाचन तंत्र के रोगों का निवारण होता है । मंगल के देव हनुमान जी एवं देवी दुर्गा का कृपा प्राप्त होता है । आकस्मिक दुर्घटना से रक्षा होती है । प्रबन्धन की तैयारी , सेना की तैयारी , अच्छे चिकित्सक बनने की तैयारी में यह यंत्र सहायता करता है । जीवन में जोश , उमंग को देता है , शरीर को स्फूर्ति और गति प्रदान करता है , व्यक्ति अपने को ऊर्जावान महसूस करता है और देवी दुर्गा और हनुमानजी की कृपा को अनुभूत करता है । यह यंत्र साधारण नहीं है बल्कि अब तक का श्रेष्ठ अप्राप्य दुर्लभ गोपनीय मंत्रों से जागृत यंत्र है जो संजीवनी की तरह आपको तन मन धन से पुनर्जीवित करेगा ।

बुध यंत्र

वाणी कौशल , लेखन , एकाउंटिंग , वाणिज्य शास्त्र , स्नायु तंत्र , श्वसन प्रणाली , त्वचा इन सबमें बुध का प्रभाव होता है । बेहतर रोजगार के लिये वाणी की कुशलता वर्तमान समय की मांग है । आप अपनी वाणी के प्रभाव से कितनों को आकर्षित कर सकते हैं लेकिन यदि बुध कमजोर हो तो आपकी वाणी में वो जादू नहीं दिख पाता । छोटे बच्चे हकलाने और तुतलाने लगते हैं । राइटिंग अच्छी नहीं होती । अपने आपको अभिव्यक्त नहीं कर पाते । एक अच्छा ज्योतिष समझ जाता है कि व्यक्ति बुध से पीड़ित है और यह भी सत्य है कि ज्योतिषी भी तभी समझ पायेगा जब उसके स्वयं की कुण्डली में बुध अच्छे हों ,यानी एक कुशल एस्ट्रोलॉजर ( ज्योतिषी ) बनने के लिये भी बुध का अनुकूल होना जरूरी है ।
कामर्स के विद्यार्थी के लिये , बैंकिग सेवा की तैयारी में सफलता के लिये बुध का अनुकूल होना जरूरी है । बढ़ते प्रतिस्पर्धा के युग में माता पिता अपनी संतान को बोलने की कुशलता में पिछड़ते नहीं देख सकते उनके लिये बुध का उपाय आवश्यक होता है । त्वचा के रोग , एलर्जी , अस्थमा , नर्वस सिस्टम के रोग , मानसिक विकार , अनिद्रा बुध के दोष के कारण प्रकट होते हैं । सिद्ध बुध के यंत्र द्वारा इन सब समस्याओं का समाधान होता है ।

गुरु यंत्र

गुरु या बृहस्पति आकाश तत्व के प्रतीक हैं । ये देवगुरु हैं , धर्म के प्रतीक हैं , तीर्थों के प्रमुख देव हैं । ये अध्यापक हैं । शिक्षा के क्षेत्र में , साहित्य के क्षेत्र में , बड़े प्रबन्धक के रूप में , दार्शनिक के रूप में , तर्क और विश्लेषण में ( एनेलिटिकल सेवाओं में ) धर्म के क्षेत्र में इनका प्रभाव है । इन सब क्षेत्रों में सफलता के लिये बृहस्पति का यंत्र कारगर है ।
बृहस्पति के कमजोर होने से पति की स्थिति कमजोर हो जाती है । विवाह में विलंब होता है , पति की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती । पुत्र सन्तान की प्राप्ति में बाधा आती है । बच्चों की शिक्षा पर विघ्न पड़ता है । यकृत ( लिवर ) की समस्या होती है । मधुमेह (डायबिटीज ) हो जाता है । इस कलियुग में व्यक्ति जैसे जैसे धर्म से दूर हो रहा है वैसे वैसे देवगुरु बृहस्पति की कृपा दूर होती जा रही है इसलिये ज्यादातर लोग अब लिवर और डायबिटीज की समस्या से ग्रस्त पाये जा रहें हैं । बृहस्पति के आशीर्वाद से पुत्र सन्तान की प्राप्ति होती है । व्यक्ति धार्मिक कार्यों में रुचि लेता है । बच्चों के पठन पाठन में सहायता मिलती है । बृहस्पति के कमजोर होने पर पुखराज धारण किया जाता है लेकिन वह व्यक्ति तक सीमित होता है यदि सिद्ध यंत्र को गृह में प्रतिष्ठित किया जाये तो पूरे परिवार पर देवगुरु की कृपा बरसती है । सिद्ध यंत्र का प्रभाव तत्काल दिखाई देगा जिसे सभी अनुभूत करेंगे ।

शुक्र यंत्र

कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर हों तो दाम्पत्य सुख में कमी हो जाती है । विवाह में विलंब होता है । सन्तानोत्पत्ति में विलंब होता है । जीवन में सुंदरता का अभाव हो जाता है । घर में साफ सफाई यदि नहीं दिखती हो तो यह शुक्र के कमजोर होने के संकेत हैं । पति पत्नी में कलह रहता है ।
शुक्र लालित्य को प्रकट करता है । सिनेमा , साहित्य ,कला में इसका प्रभाव है इसीलिए भारत में फिल्में शुक्रवार के दिन रिलीज़ होतीं हैं । यदि सिनेमा , साहित्य , कला , फैशन डिजाइनिंग में कैरियर बनाना है तो शुक्र का मजबूत होना सकारात्मक होता है ।
शुक्र के दुर्बल होने से यौन रोग , गाल , ठुड्डी और नसों के रोग होते हैं । शुक्र जीवन का रस है । हार्मोन्स को नियंत्रित करता है , यदि यह कमजोर हुआ तो हार्मोनल समस्या हो जाती है । सिद्ध शुक्र यंत्र से इन सभी समस्याओं का समाधान होता है ।

शनि यंत्र

शनि ग्रह की भयावहता से अधिकतर परिचित हैं । ये दंडाधिकारी हैं । जीवन में यदि मेहनत का फल न मिल रहा हो , हर शुरुआत में रुकावट आ रहा हो , कभी बीमारी से कभी पैसों की कमी से कार्य बन न रहें हों , विवाह की उम्र निकलती जा रही हो , शिक्षा में रुकावट आ रही हो , अचानक से चोटिल हुए जा रहे हों तो इसके पीछे शनि ग्रह की प्रतिकूलता होती है ।
शनि के क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट है , लौह , खनिज , कोयला हैं , ऑटोमोबाइल है । इन सबमें शनि की अनुकूलता होनी जरूरी है ।
शनि के दुर्बल होने से आंतों के रोग , अर्थराइटिस , घुटने के रोग , सन्धियों के रोग हो जाते हैं । शनि की खराब दशा में अचानक से दुर्घटना के योग बनते हैं । शनि की साढ़ेसाती , दशा , महादशा में अपने भी धोखा दे जाते हैं । व्यक्ति हर ओर से अकेला हो जाता है , आर्थिक तंगी के चलते कर्ज में चला जाता है । सिद्ध शनि के यंत्र और उपाय द्वारा शनि की खराब दशा में सुधार होता है । जीवन के इस अंधकार के क्षणों में सिद्ध शनि यंत्र एक प्रकाश की अनुभूति देगा ।

राहू यंत्र

अचानक से जीवन में परिवर्तन करना राहू का गुण है । शेयर बाजार , जुआ , सट्टा , लाटरी , राजनीति , खेल , सिनेमा , मदिरालय , वेश्यालय इन सब स्थानों पर राहू का प्रभाव होता है । कालसर्प दोष के कारण ये राहू और केतू ग्रह हैं । राहू अचानक से सफलता और असफलता देता है । शरीर में न समझ आने वाले रोग राहू की देन होते हैं । खुजली , मानसिक विकार , एंग्जाइटी , डिप्रेशन , शराब की लत , भय , गैस , पढ़ाई में मन न लगना , अधैर्य , ब्लड प्रेशर ये सब राहू के दोष चलते उतपन्न होतें हैं । यदि राहू अनुकूल हो जाएं तो अकस्मात धन की प्राप्ति होती है , प्रसिद्धि मिलती है , आप जिस भी कार्य में हाथ डालेंगे उसमें सफलता मिलती है । मिट्टी छूने पर सोना बन जाता है , ऐसी ताकत राहू में होती है । राहू परम् आध्यत्मिक ग्रह भी है । प्रकृति के सारे रहस्यों को अनावृत करने की क्षमता राहू के पास है । राहू पूर्वार्जित दोषों का फल देता है ।
पित्र दोष , प्रेत बाधा , टोटके जैसी बाधायें पूरे परिवार में बनी रहती है । अचानक से नौकरी में ट्रांसफर या अवनति हो , लगातार मृत सन्तान हो रहे हों तो यह सब राहू के कारण होता है । बच्चे भयग्रस्त रहते हैं , कोई भी रोग ईलाज कराने पर भी समाधान नहीं मिलता । तनाव और अनिद्रा से परेशान व्यक्ति को कोई उपाय काम नहीं करता ।
सिद्ध राहू यंत्र से राहू के दोष कम होते जायेंगे । जीवन से डर , तनाव , चिंता कम हो जाएगी , कोई भी व्यवसाय में आशातीत लाभ मिलेगा , जीवन में अचानक से आने वाली बाधाओं का निवारण होगा , कालसर्प दोष में लाभ होगा और आध्यात्मिक उत्थान होगा ।

केतू यंत्र

यह एक मोक्षकारक ग्रह है । तर्क , बुद्धि , ज्ञान , वैराग्य , कल्पना , विचारशीलता , दार्शनिकता ये सब इसके गुण हैं । स्वभाव इसका अग्निमय है । यह धुन का पक्का बनाता है एक प्रकार से सनकी कह सकते हैं । अशुभ केतू यदि प्रजनन सम्बन्धित ग्रहों से युक्त हों जायें तो नपुंसकता उतपन्न हो जाती है । त्वचा में फोड़े फुंसियां होते रहने में इनका प्रभाव है । कान , रीढ़ की हड्डी , सन्तान उत्पत्ति में बाधा , बाल झड़ना , नसों में कमजोरी , पथरी , इसके अशुभ प्रभाव हैं ।
सिद्ध केतू यंत्र द्वारा उपरोक्त अशुभ प्रभावों का समाधान होता है । धर्म के क्षेत्र में शुभ केतू कीर्ति को बढ़ाता है ।

माणिक्य

सिद्ध माणिक्य को धारण करने से सूर्य ग्रह के दोष दूर होतें हैं । नौकरी में पदोन्नति , समाज में प्रतिष्ठा , राजनीतिक जीवन में यह रत्न उपयोगी है ।

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मूंगा

सिद्ध मूंगा को पहनने से कुण्डली में मंगल ग्रह के दोष दूर होतें हैं । आत्मविश्वास में वृद्धि के लिये , रक्त दोष , निम्न रक्तचाप , हृदय रोगों में यह रत्न उपयोगी है ।

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पुखराज

सिद्ध ओरिजनल पुखराज को धारण करने से गुरु ( बृहस्पति ) ग्रह के दोषों का समाधान होता है । शीघ्र विवाह , पुत्र सन्तान की प्राप्ति , विद्या की प्राप्ति , उच्चतर शिक्षा , लिवर की बीमारी में यह रत्न उपयोगी है ।

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मोती

सिद्ध मोती को धारण करने से चंद्र ग्रह के दोष दूर होतें हैं । उच्चरक्तचाप , मानसिक विकार , स्त्री रोग में लाभ एवं पढ़ाई में मन लगने के लिये यह उपयोगी रत्न है ।

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हीरा

प्राणप्रतिष्ठित हीरे या डायमंड का प्रयोग शुक्र ग्रह के दोष को दूर करने के लिये होता है । दाम्पत्य सुख , विवाह में विलंब , फिल्मों में सफलता , हार्मोनल समस्याओं में यह रत्न उपयोगी है ।

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पन्ना

सिद्ध पन्ना रत्न बुध ग्रह के दोषों को दूर करता है । रोजगार की समस्या , बोलने की क्षमता का विकास , बुद्धि के विकास , श्वसन तंत्र के रोगों , नर्वस सिस्टम के रोगों में यह उपयोगी है ।

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नीलम

सिद्ध ओरिजनल नीलम कुण्डली में शनि के दोषों को दूर करता है । सभी शुभ कार्यों में विघ्न , असाध्य बीमारी , शनि की साढ़ेसाती , विवाह में देरी , जीवन स्थिरता के अभाव , शरीर में ज्वाइंट रोगों में , वायु विकार में यह रत्न उपयोगी है ।

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गोमेद

सिद्ध गोमेद राहू ग्रह के दोषों को दूर करता है । राजनीति , फ़िल्म , शेयर बाजार , लाटरी में सफलता के लिये , रोजगार की प्राप्ति के लिये यह उपयोगी है । मानसिक विकार , उन्माद , हिस्टीरिया , जादू टोने के प्रभाव , ऐसे रोग जिनके मूल कारण का पता न चले में उपयोगी है ।

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लहसुनिया

सिद्ध लहसुनिया केतू के दोषों को दूर करता है । बार बार नजर लगना , चोट लगना , अत्यधिक क्रोध के उपाय के लिये यह रत्न उपयोगी है ।